औरंगाबाद की बेटियों की रहस्यमयी मौतों से बिहार दहला, सिस्टम कटघरे में
बिहार की राजधानी पटना से उठ रही खबरें अब सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि खौफनाक चेतावनी बन चुकी हैं। NEET की तैयारी के लिए सपने लेकर आई औरंगाबाद की बेटियाँ, आज लाश बनकर लौट रही हैं — और सिस्टम खामोश है।
ताज़ा मामला औरंगाबाद की नाबालिग NEET छात्रा का है, जिसकी पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में संदिग्ध हालात में मौत हो गई। परिजनों का सीधा आरोप है—
“यह आत्महत्या नहीं, साजिशन हत्या है… और सबूत मिटाने की कोशिश हुई।”
हॉस्टल नहीं, डर का अड्डा!
परिवार का दावा है कि
छात्रा के शरीर पर चोट और संदिग्ध निशान थे
घटना के बाद जानबूझकर देर से अस्पताल ले जाया गया। पुलिस को सूचना देने में खेल किया गया, हॉस्टल प्रबंधन ने पूरी सच्चाई छिपाने की कोशिश की
एक मौत नहीं, खतरनाक पैटर्न
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह अकेला मामला नहीं है।
बीते समय में पटना के अलग-अलग हॉस्टलों में NEET छात्राओं की रहस्यमयी मौतें सामने आई हैं — जिनमें कई छात्राएं औरंगाबाद व आसपास के जिलों की बताई जा रही हैं।
सवाल उठता है —
क्या यह महज इत्तेफाक है, या किसी गहरे खेल की आहट? जांच या लीपापोती?
पुलिस ने जांच और SIT की बात कही है, लेकिन पीड़ित परिवारों का आरोप है कि
“अगर हम सड़क पर नहीं उतरते, तो बेटी की मौत को आत्महत्या बताकर बंद कर दिया जाता।”
उबाल पर सियासत, सड़कों पर आक्रोश
मामले ने बिहार की राजनीति में आग लगा दी है।
छात्र संगठन, महिला आयोग, सामाजिक कार्यकर्ता — सभी एक ही सवाल पूछ रहे हैं:
क्या बिहार की बेटियाँ पढ़ने के लिए सुरक्षित नहीं?
कौन चला रहा है हॉस्टल माफिया?
दोषी सिर्फ एक वार्डन, या पूरा सिस्टम?
औरंगाबाद की बेटियों को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है?
खामोशी अब अपराध है
NEET जैसी परीक्षा की तैयारी कर रही छात्राओं के साथ अगर राजधानी में यह हाल है, तो भविष्य किसके भरोसे छोड़ा जा रहा है?






