औरंगाबाद से बड़ी खबर सामने आई है, जहां आज व्यवहार न्यायालय में 13 साल पुराने चर्चित हत्याकांड में कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाया। जिला जज अष्टम मनीष कुमार जायसवाल ने खुदवा थाना कांड संख्या-03/13 (एसटीआर-267/13, 177/24) में सुनवाई करते हुए पिता-पुत्र को दोषी मानते हुए 7-7 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के एपीपी प्रदीप कुमार सिंह के अनुसार, मुख्य अभियुक्त फेकु पासवान और उसका पुत्र सुजित कुमार उर्फ भलुआ, दोनों रामनगर खुदवा के निवासी हैं, जिन्हें भादंवि की धारा 304 के तहत 15 अप्रैल 2026 को दोषी करार दिया गया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
आज सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने प्रत्येक अभियुक्त को 7 साल की सश्रम कैद और 5 हजार रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक साल अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
मामले की जानकारी देते हुए अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि वादिनी प्रभावती देवी ने 10 जनवरी 2013 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि 9 जनवरी 2013 की रात करीब 9 बजे उनके पति दिलेश्वर राम को अभियुक्तों ने लाठी-डंडों से पीट-पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। शोर मचाने पर ग्रामीण जुटे, तब आरोपी मौके से फरार हो गए।
घायल दिलेश्वर राम को पुलिस द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ओबरा ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बाद में सदर अस्पताल औरंगाबाद में पोस्टमार्टम कराया गया था।
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 17 गवाहों की गवाही हुई। बताया जाता है कि घटना के पीछे दोनों पक्षों के बीच पुराना आपसी विवाद (वैमनस्य) था।
13 साल बाद मिला इंसाफ, इलाके में फैसले की चर्चा तेज!






