औरंगाबाद। व्यवहार न्यायालय, औरंगाबाद के विशेष पॉक्सो न्यायाधीश लक्ष्मीकांत मिश्रा ने पॉक्सो वाद संख्या 79/25 (कासमा थाना कांड संख्या 87/25) में दोषसिद्ध अभियुक्त गुंजन सिंह बंदेया को नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने और उससे जबरन विवाह करने के मामले में 20 वर्ष के सश्रम कारावास तथा जुर्माने की सजा सुनाई है।
विशेष लोक अभियोजक शिवलाल मेहता के अनुसार न्यायालय ने 6 जुलाई 2026 को अभियुक्त को बीएनएस एवं पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं में दोषी ठहराया था। 10 जुलाई को सजा के बिंदु पर सुनवाई के उपरांत पॉक्सो अधिनियम की धारा 4(2) एवं बीएनएस की धारा 65(1) के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 30 हजार रुपये के जुर्माने तथा बीएनएस की धारा 87 के तहत सात वर्ष के कारावास एवं 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियुक्त पूर्व में चार माह 22 दिन न्यायिक हिरासत में रह चुका है।
न्यायालय ने बिहार पीड़ित प्रतिकर योजना, 2019 के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद को पीड़िता को एक लाख रुपये का मुआवजा दिलाने में सहयोग करने का निर्देश दिया है। अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही के अनुसार पीड़िता के पिता ने 28 जून 2025 को प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उनकी पुत्री अल्ट्रासाउंड कराने रफीगंज गई थी, जहां से अभियुक्त उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया और अगले दिन देवकुंड में जबरन विवाह कर लिया। पीड़िता ने फोन पर रोते हुए अपने पिता को घटना की जानकारी दी थी। इस मामले में 31 अक्टूबर 2025 को आरोप तय किए गए थे और त्वरित सुनवाई के बाद न्यायालय ने निर्णय सुनाया।






