पूछता है बिहार: मैं भी शराबबंदी, तू भी शराबबंदी! अधिकारी के घर करोड़, सिपाही के कमरे में बीयर—कौन किसको पकड़ेगा?

औरंगाबाद: फ्रेंड्स मीडिया
बिहार सरकार जहां शराबबंदी को “जन आंदोलन” बनाने के मिशन पर लगी है, वहीं औरंगाबाद के कुटुंबा थाना क्षेत्र से आई एक ताज़ा खबर ने लोगों को हैरान भी कर दिया और मुस्कुराने पर भी मजबूर कर दिया। शराबबंदी की जिम्मेवारी संभालने वाला एएसआई महेंद्र पासवान खुद मिनी बीयर के साथ धराया गया।

जिस थाने में शराब पकड़कर जमा होती थी, वहीं के सरकारी कमरे से 6 बोतल बीयर बरामद हुईं—और फिर क्या, सरकार के “नशामुक्त बिहार” अभियान के सिपाही खुद सलाखों के पीछे!

सबसे मजेदार बात ये रही कि गिरफ्तारी उस समय हुई जब साहब अदालत में कुछ अभियुक्तों को ले जा रहे थे—लेकिन किस्मत पलटी और खुद ही अभियुक्त बन गए।

और भी दिलचस्प — अधिकारी घर से करोड़ों, सिपाही कमरे से बीयर!

कुछ ही दिन पहले उत्पाद अधीक्षक के कई ठिकानों पर SVU टीम ने रेड मारकर लगभग 1.58 करोड़ की अवैध संपत्ति मिलने का दावा किया था। उस पर जिलावासियों की चर्चा अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि इधर कुटुंबा के “बीयर बाबू” ने माहौल गर्म कर दिया।

आमलोगों में चर्चा — “बिहार में शराबबंदी सफल है… लेकिन शराबबंदी वालों के घरों में!” सवाल बड़ा, जवाब कौन देगा?

सरकार बार-बार कहती है —‘नशामुक्त बिहार हमारा सपना है।’ लेकिन जब एक ओर अधिकारी के यहां करोड़ों की रेड और दूसरी ओर शराबबंदी लागू कराने वाला एएसआई खुद शराब के आरोप में गिरफ्तार…तो बिहार की जनता पूछने लगी है —

क्या वाक़ई नशामुक्त बिहार का सपना पूरा हो पाएगा, या फिर यह सपना यूँ ही फाइलों और पोस्टरों में सजता रहेगा?

कुल मिलाकर- यह घटना फिर साबित करती है कि कानून लागू करना आसान है, लेकिन कानून को लागू करने वालों को कानून में बांधना सबसे मुश्किल!