औरंगाबाद, 28 जुलाई 2025 –
मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बहुचर्चित हत्या कांड में आज व्यवहार न्यायालय औरंगाबाद ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए छह अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एडीजे-8 न्यायाधीश मनीष जयसवाल की अदालत ने कांड संख्या 42/21, एसटीआर-246/21, 32/24 में यह फैसला सुनाया।
विशेष लोक अभियोजक (एपीपी) प्रदीप कुमार सिंह ने जानकारी दी कि दोषी करार दिए गए अभियुक्तों में अजय सिंह, निर्मला देवी, रामप्रवेश सिंह, संतोष सिंह, संजीत सिंह और सुजीत सिंह कुंडा मुफस्सिल शामिल हैं। सभी को भारतीय दंड विधान की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास एवं 20,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना न देने की स्थिति में उन्हें तीन वर्ष अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
इसके साथ ही अभियुक्त संतोष सिंह और सुजीत सिंह को शस्त्र अधिनियम (27 आर्म्स एक्ट) के तहत भी दोषी पाए जाने पर सात-सात वर्ष की सजा और 10,000-10,000 रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। जुर्माना नहीं देने पर उन्हें एक-एक साल अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
क्या है मामला?
मामला 5 मार्च 2021 का है, जब प्राथमिकी सूचक रिंकु कुमार ने मुफस्सिल थाना में एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनके चाचा अजय सिंह और रामप्रवेश सिंह गांव के मरहटिया से शमीम बगीचे के बीच स्थित खेत में आलू खोद रहे थे। इसी दौरान सूचक रिंकु कुमार और उनके भाई मिकुं कुमार ने अपने चाचा से पूछा कि उनके बटाईदार को खेत में काम करने से क्यों मना किया गया।
इस पर विवाद बढ़ गया और आरोप है कि अजय सिंह, रामप्रवेश सिंह, निर्मला देवी और उनके पुत्रों ने हमला कर दिया। वहीं, सुजीत सिंह और संतोष सिंह ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें मिकुं कुमार को गोली लगने से घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई थी।
नौ गवाहों के बयान से हुई पुष्टि
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 9 गवाहों की गवाही कराई गई, जिससे आरोपियों के खिलाफ मामला मजबूत हुआ। अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर 16 जुलाई 2025 को सभी आरोपियों को दोषी करार दिया गया था।
न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने पर परिजनों ने जताया संतोष
पीड़ित परिवार ने न्यायालय के फैसले पर संतोष जताया है और कहा है कि देर पर अंधेर नही।