घंटों दर्द से तड़पती रही गर्भवती महिला, आखिरी वक्त में डॉक्टरों ने कहा – ‘कहीं और ले जाइए’, निजी अस्पताल में बची मां-बच्चे की जान
औरंगाबाद। जिले का सदर अस्पताल एक बार फिर अपनी बदहाल व्यवस्था और लापरवाही को लेकर सवालों के घेरे में है। करोड़ों रुपये की लागत से बना यह नौ मंजिला अस्पताल आखिर गरीबों के लिए कितना कारगर है, यह सवाल एक बार फिर उठ खड़ा हुआ है।
जानकारी के अनुसार शहर के गांधी नगर मुहल्ले की एक गर्भवती महिला को शुक्रवार की रात प्रसव के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि महिला पूरी रात और दिन दर्द से तड़पती रही, लेकिन डॉक्टर और नर्स हर बार पूछने पर उसकी स्थिति सामान्य बताते रहे।
शनिवार की शाम करीब चार बजे डॉक्टरों ने परिजनों को आश्वस्त किया कि घबराने की कोई बात नहीं है, जरूरत पड़ी तो ऑपरेशन कर दिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद परिजन कुछ देर के लिए निश्चिंत हो गए।
लेकिन शाम करीब पांच बजे स्थिति अचानक बदल गई। नर्सों ने पहले कहा कि 15 मिनट में डिलीवरी हो जाएगी, लेकिन थोड़ी ही देर बाद डॉक्टरों ने परिजनों के हाथ में पर्ची थमाते हुए कह दिया कि “बच्चा फंस गया है, मरीज को तुरंत कहीं और ले जाइए।” जैसे कि अब उनकी जिम्मेवारी खत्म हो गयी । यह सुनते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई और अस्पताल परिसर में ही रोना-बिलखना मच गया।
परिजनों ने सदर विधायक से भी मांगी मदद
परिजनों के अनुसार वे अत्यंत गरीब हैं, इसलिए सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आए थे। जब स्थिति गंभीर होने लगी तो उन्होंने स्थानीय विधायक से फोन पर मदद भी मांगी थी। विधायक ने भरोसा दिलाया था कि अस्पताल में बात कर सब ठीक करा दिया जाएगा। इसके बाद डॉक्टरों ने भी आश्वासन दिया कि घबराने की कोई बात नहीं है। लेकिन उनका आश्वासन भी अंततः बेबस परिजनों के दर्द को कम नहीं कर सका।
लेकिन अचानक डॉक्टरों द्वारा हाथ खड़े कर देने के बाद परिजन घबरा गए और आनन-फानन में महिला को एक निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टर ने तुरंत इलाज शुरू किया और कुछ ही मिनटों में ऑपरेशन कर जच्चा और बच्चा दोनों की जान बचा ली।
इस घटना के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि जब आए दिन सदर अस्पताल की लापरवाही सामने आती है, तब भी जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि आखिर मौन क्यों हैं?
क्या करोड़ों की लागत से बना यह नौ मंजिला अस्पताल सिर्फ शहर की शोभा बनकर रह गया है?
गरीब परिवारों का कहना है कि यदि समय रहते सही इलाज मिल जाए, तो उन्हें अपनी जान बचाने के लिए निजी अस्पतालों की ओर भागना नहीं पड़ता।
FRIENDS MEDIA की टीम से बात करते हुए परिजन एक ही स्वर में कहा कि हम जिला पदाधिकारी , सांसद , विधायक से मांग करते हैं कि इस अस्पताल की व्यवस्था में सुधार कराया जाए ताकि यंहा इलाज के लिए आने वाले गरीबों का भरोसा न टूटे।
“हालांकि इस मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनसे सम्पर्क नहीं मिल सका।”






