औरंगाबाद, 25 अगस्त 2026। एनीमिया मुक्त भारत अभियान को नई गति देने के उद्देश्य से मंगलवार को बिहार में “एनीमिया मुक्त बिहार” विशेष अभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया। पटना में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम का सीधा प्रसारण टू-वे कम्युनिकेशन के माध्यम से राज्य के विभिन्न जिलों के चयनित स्वास्थ्य संस्थानों में किया गया। औरंगाबाद जिले से सदर अस्पताल, औरंगाबाद, अनुमंडलीय अस्पताल दाउदनगर, रेफरल अस्पताल कुटुम्बा, नबीनगर एवं हसपुरा के स्वास्थ्य संस्थान इस कार्यक्रम से जुड़े।
सदर अस्पताल में हुआ जिला स्तरीय कार्यक्रम
जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल, औरंगाबाद में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा उपस्थित रहीं। उन्होंने कहा कि एनीमिया की रोकथाम और नियंत्रण को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह संकल्पित है। विशेष अभियान के माध्यम से एनीमिया की समय पर पहचान, जांच, उपचार और रोकथाम के साथ-साथ आम लोगों को जागरूक करने का कार्य व्यापक स्तर पर किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने कहा कि एनीमिया केवल स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास, किशोर-किशोरियों के स्वास्थ्य, महिलाओं के स्वास्थ्य तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसलिए अभियान के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना प्राथमिकता होगी।
किशोर-किशोरियों और महिलाओं पर रहेगा विशेष फोकस
अभियान के तहत विभिन्न आयु वर्ग के लोगों में एनीमिया की पहचान और उपचार के लिए विशेष गतिविधियां संचालित की जाएंगी। खासतौर पर किशोर-किशोरियों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और प्रजनन आयु वर्ग की महिलाओं तक जांच एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर विशेष जोर रहेगा।
स्वास्थ्य विभाग के साथ शिक्षा, आईसीडीएस, पंचायती राज एवं अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से जागरूकता और जांच अभियान को व्यापक बनाया जाएगा। लोगों को आयरन एवं फोलिक एसिड की निर्धारित खुराक के नियमित सेवन, संतुलित एवं पोषणयुक्त आहार तथा एनीमिया से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
माइक्रो-प्लान से होगी अभियान की मॉनिटरिंग
जिला पदाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप माइक्रो-प्लान तैयार कर समयबद्ध तरीके से गतिविधियों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने जांच, उपचार, दवा वितरण एवं जागरूकता कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा और अनुश्रवण करने को कहा।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रखंड स्तर से लेकर स्वास्थ्य उपकेंद्र और समुदाय स्तर तक अभियान की गतिविधियों की प्रभावी मॉनिटरिंग की जाए। लक्षित लाभार्थियों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा करते हुए कम उपलब्धि वाले क्षेत्रों में विशेष रणनीति के तहत कार्य करने पर भी जोर दिया गया।
आशा-एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम
एनीमिया मुक्त बिहार अभियान को सफल बनाने में आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं अन्य अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इनके माध्यम से गांव-गांव और समुदाय स्तर पर लोगों को एनीमिया के लक्षण, जांच की आवश्यकता, आयरन-फोलिक एसिड के सेवन और पोषण संबंधी व्यवहार के बारे में जानकारी दी जाएगी।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक ने बताया कि एनीमिया मुक्त बिहार का लक्ष्य केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, आईसीडीएस सहित सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय और समुदाय की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
ये अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार, उप विकास आयुक्त कुमारी अनुपम सिंह, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मिथिलेश प्रसाद सिंह, जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. रवि रंजन, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. आशुतोष कुमार, जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट उपेंद्र कुमार चौबे, जिला सामुदायिक उत्प्रेरक (आशा) आनंद प्रकाश, डीपीसी नागेंद्र कुमार केशरी, जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी अविनाश वर्मा, अस्पताल प्रबंधक प्रफुल्ल कांत निराला सहित सदर अस्पताल के विभिन्न पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।






