पटना | 17 अक्टूबर 2026 | Friends Media
पटना: बिहार में तीन तलाक कानून के तहत एक अहम न्यायिक फैसला सामने आया है। पटना की अदालत ने पत्नी को तत्काल तीन तलाक देने के मामले में बिहटा निवासी नौशाद अहमद को दो साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 6,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इसे बिहार में तीन तलाक कानून के तहत पहली दोषसिद्धि बताया जा रहा है।
शादी के 21 साल बाद पहुंचा मामला अदालत
मामले के अनुसार, नौशाद अहमद की शादी रजिया सुल्तान उर्फ गुड़िया से 9 नवंबर 2001 को हुई थी। दंपती के तीन बच्चे हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2022 में पति ने पत्नी को प्रताड़ित किया और 5 सितंबर 2022 को तत्काल तीन तलाक दे दिया।
पत्नी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद 31 जुलाई 2023 को अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए।
किन धाराओं में हुई सजा?
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-24 राजीव रंजन सहाय की अदालत ने नौशाद अहमद को मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 4 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 323 और 341 के तहत दोषी ठहराया।
अदालत ने दो साल के सश्रम कारावास और 6,500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं चुकाने पर दोषी को एक महीने और 22 दिन की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जुर्माने की राशि शिकायतकर्ता को दिए जाने का भी प्रावधान बताया गया है।
तेजाब हमले के आरोप में मिली राहत
मामले में पत्नी पर तेजाब फेंकने की कोशिश का आरोप भी लगाया गया था। हालांकि, अदालत ने इस अलग आरोप में नौशाद अहमद को बरी कर दिया। दोषसिद्धि के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने की बात बचाव पक्ष के वकील ने कही है।
क्या कहता है तीन तलाक कानून?
मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत तत्काल तीन तलाक को अवैध और शून्य घोषित किया गया है। कानून की धारा 4 के तहत ऐसा करने वाले पति को अधिकतम तीन साल तक की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है।
पटना की अदालत का यह फैसला बिहार में तीन तलाक से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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