“हम तो टोकेंगे साहब” रोज़ का जाम, रोज़ का तनाव—औरंगाबाद में ट्रैफिक व्यवस्था तोड़ने लगी दम, क्या प्रशासन अब स्थायी समाधान देगा?
जिसकी दूरी मिनटों की है—उसे पार करने में आधा घंटा या उससे भी ज्यादा समय लग जाता है।
जिसकी दूरी मिनटों की है—उसे पार करने में आधा घंटा या उससे भी ज्यादा समय लग जाता है।
14 नवंबर को अनावश्यक रूप से मुख्यालय क्षेत्र की ओर न जाएँ, ताकि मतगणना प्रक्रिया शांतिपूर्ण व सुरक्षित माहौल में पूरी हो सके।
“रेडियो दोस्ती की परिकल्पना बहुआयामी है — यह न केवल मनोरंजन का साधन बनेगा, बल्कि बंदियों में सामाजिक व कानूनी जागरूकता बढ़ाने में भी मदद करेगा।”
कैदियों से बातचीत के दौरान उनकी समस्याओं को सुनते हुए जेल प्रशासन को कई तात्कालिक निर्देश दिए।
आंतरिक जांच टीम इस दिशा में भी दस्तावेज़ और साक्ष्य खंगाल रही है।
फर्जी आईपीएस ने हिला दी औरंगाबाद पुलिस की व्यवस्था — असली पुलिस को ही फंसा गया जाल में! Read More »
पदाधिकारी श्रीकांत शास्त्री एवं पुलिस अधीक्षक अम्बरीष्ट राहुल स्वयं स्थल पर मौजूद रहे।
डीएम ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और सुगम आवागमन सर्वोच्च प्राथमिकता पर हो।
लोगों की आँखें फटी की फटी रह गईं। कुछ महिलाएँ बेहोश तक हो गईं।
14 अक्टूबर को यह सपना साकार होगा — औरंगाबाद न्यायिक परिवार के लिए यह दिन स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो जाएगा।