संवेदनहीन सिस्टम की तस्वीर: सदर अस्पताल में घंटों कंधे पर बेटी को ढोता रहा पिता, व्हीलचेयर तक नसीब नहीं


सासाराम।
रोहतास जिले के सदर अस्पताल सासाराम से स्वास्थ्य व्यवस्था की शर्मनाक और संवेदनहीन तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी दावों की पोल खोल कर रख दी है। नोखा थाना क्षेत्र के तेनुआं गांव से अपनी घायल बेटी के इलाज के लिए आया एक बेबस पिता अस्पताल में व्हीलचेयर तक के लिए तरसता रहा। मजबूरी में उसे अपनी जवान बेटी को घंटों कंधे पर लादकर अस्पताल के एक विभाग से दूसरे विभाग तक भटकना पड़ा।

बेटी का पैर फ्रैक्चर था, वह चलने की स्थिति में नहीं थी। बावजूद इसके, अस्पताल प्रशासन की उदासीनता ऐसी रही कि बार-बार आग्रह करने के बाद भी पिता को व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं कराई गई। इलाज की जगह यह पिता अपनी बेटी को पीठ पर उठाकर डॉक्टर, एक्स-रे और अन्य जांच कक्षों के चक्कर काटता रहा।

पिता का दर्द, सिस्टम की बेरुखी

पीड़ित पिता ने बताया कि वे बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर सदर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन यहां हालात और भी बदतर मिले। बेटी के फ्रैक्चर पैर के बावजूद उन्हें खुद ही उसे उठाकर ले जाना पड़ा। पिता ने कहा कि अस्पताल में मौजूद कर्मियों से मदद मांगी, लेकिन किसी ने उनकी मजबूरी नहीं समझी।

कर्मियों की मौजूदगी में होती रही अनदेखी

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अस्पताल परिसर में स्वास्थ्यकर्मी और चिकित्सक मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी मानवता दिखाने की जरूरत नहीं समझी। एक पिता अपनी घायल बेटी को कंधे पर उठाकर इधर-उधर दौड़ता रहा और पूरा सिस्टम तमाशबीन बना रहा।

करोड़ों खर्च, फिर भी बुनियादी सुविधा नदारद

सरकार एक ओर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने के दावे कर रही है, वहीं जिले के सबसे बड़े अस्पताल में व्हीलचेयर जैसी बुनियादी सुविधा तक मरीजों को नहीं मिल पा रही है। यह घटना न केवल अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीन कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।


यह तस्वीर बताने के लिए काफी है कि कागजों पर चमकती योजनाएं जमीनी हकीकत में किस तरह दम तोड़ रही हैं।