ग्राम कचहरियों ने किया 4 लाख मामलों का निष्पादन, न्यायमित्रों की मांगों को लेकर औरंगाबाद में हुई अहम बैठक


औरंगाबाद।
बिहार के ग्राम कचहरियों ने न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए अब तक लगभग 4 लाख मामलों का निष्पादन कर न्याय व्यवस्था पर बढ़ते बोझ को कम करने में अहम भूमिका निभाई है। इस उपलब्धि को लेकर सुप्रीम कोर्ट और पटना हाईकोर्ट द्वारा भी ग्राम कचहरियों के कार्यों की सराहना की जा चुकी है।


इसी क्रम में जिला विधिज्ञ संघ, औरंगाबाद परिसर में जिला न्यायमित्र संघ की वार्षिक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष उदय कुमार सिन्हा ने की, जबकि संचालन महासचिव सतीश कुमार सिंह ने किया।


इस अवसर पर अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से एक मांग पत्र तैयार किया गया है, जिसे बिहार सरकार के मुख्य सचिव, पटना को भेजा जाएगा। 18 वर्षों से न्याय सेवा में लगे हैं न्यायमित्र बैठक में बताया गया कि बिहार के ग्राम कचहरियों में कार्यरत न्यायमित्र पिछले 18 वर्षों से वैध संविदा पर सेवाएं दे रहे हैं। इन्होंने ग्रामीण स्तर पर त्वरित और सुलभ न्याय सुनिश्चित करते हुए लाखों मामलों का निपटारा किया है, जिससे जिला और उच्च न्यायालयों पर दबाव काफी कम हुआ है।


प्रमुख मांगें
मांग पत्र में न्यायमित्रों ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं—


सामान्य प्रशासन विभाग के संकल्प संख्या 12534 (17/09/2018) एवं 1003 (22/01/2021) के अनुरूप सभी अनुमन्य सुविधाएं लागू की जाएं। न्यायमित्रों के परिश्रमिक का वार्षिक पुनरीक्षण हो। कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम 1952 एवं कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948 का लाभ दिया जाए।


सेवा समाप्ति की स्थिति में अपील का अधिकार और प्राधिकार क्षेत्र स्पष्ट किया जाए।
वर्तमान में मात्र ₹7000 मानदेय दिया जा रहा है, जो न्यूनतम मजदूरी और सरकारी प्रारंभिक वेतन से भी कम है, इसलिए सम्मानजनक वृद्धि की जाए। सभी प्रकार के एरियर एवं लंबित भुगतान शीघ्र किए जाएं। ग्राम कचहरियों में कार्यरत न्यायमित्रों को सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।


ई-ग्राम कचहरी से बढ़ी पारदर्शिता


अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि 24 अक्टूबर 2024 से बिहार में ई-ग्राम कचहरी प्रणाली लागू हो चुकी है, जिससे न्यायिक पारदर्शिता और गति दोनों में सुधार हुआ है। ऐसे में न्यायमित्रों को उनका वाजिब अधिकार और सम्मानजनक वेतन दिया जाना पूरी तरह न्यायसंगत है।
बैठक के अंत में यह भी स्पष्ट किया गया कि जब तक न्यायमित्रों की मांगें पूरी नहीं होतीं, बिहार राज्य न्यायमित्र संघ अपने अधिकारों के लिए संगठित रूप से संघर्ष करता रहेगा।