पटना। बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री रह चुके वरिष्ठ नेता Nitish Kumar के पुत्र Nishant Kumar ने अब सक्रिय राजनीति में औपचारिक कदम रखते हुए बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल ली है। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद उन्हें स्वास्थ्य विभाग सौंपा गया, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
अब तक सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक मंचों से दूरी बनाए रखने वाले निशांत कुमार की अचानक हुई एंट्री को जदयू के अंदर नई पीढ़ी के नेतृत्व के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी समर्थकों का मानना है कि युवा चेहरा होने के कारण वे स्वास्थ्य व्यवस्था में नई सोच और तकनीकी सुधार ला सकते हैं।
स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद निशांत कुमार ने कहा कि उनकी प्राथमिकता सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था मजबूत करना, ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर इलाज उपलब्ध कराना और स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाना होगा। उन्होंने डॉक्टरों की कमी, दवाओं की उपलब्धता और मरीजों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
वहीं विपक्ष ने इस नियुक्ति को लेकर सरकार पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। विपक्षी दलों का कहना है कि बिहार में योग्य नेताओं की कमी नहीं है, फिर भी राजनीतिक परिवारों को प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि जदयू नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे “नई सोच और युवा नेतृत्व” की शुरुआत बताया है।
निशांत कुमार के मंत्री बनने के बाद अब बिहार की राजनीति में उनके भविष्य को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में वे जदयू के प्रमुख चेहरों में शामिल हो सकते हैं।






