20 साल की सेवा बेकार? सरकार की नीति पर भड़के नियोजित शिक्षक, हाईकोर्ट जाने का ऐलान


औरंगाबाद जिले में नियोजित माध्यमिक शिक्षकों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। सरकार और जिला परिषद के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए शिक्षकों ने साफ शब्दों में कहा कि 20 वर्षों की सेवा के बाद भी वरीयता और प्रोन्नति से वंचित रखना न केवल अन्याय है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुशासन पर सीधा हमला है।
अनुग्रह इंटर विद्यालय, औरंगाबाद के सामने डॉ. राकेश रंजन के आवास पर आहूत बैठक में शिक्षा विभाग के सचिव द्वारा जारी आदेश पत्रांक 4206 एवं 4207 को लेकर शिक्षकों ने तीखा विरोध दर्ज कराया। बैठक की अध्यक्षता कर रहे डॉ. राकेश रंजन (माध्यमिक शिक्षक, उच्च विद्यालय जम्होर) ने कहा कि सरकार की दोहरी शिक्षा नीति ने शिक्षकों को अलग-अलग संवर्गों में बांट कर आपस में ही विभाजित कर दिया है।
शिक्षक नेताओं ने आरोप लगाया कि माननीय पटना उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद औरंगाबाद जिला परिषद नियोजन इकाई ने जिला परिषद शिक्षक नियमावली 2020 के कंडिका 7 एवं 8 को आज तक लागू नहीं किया। छह माह की समय-सीमा खत्म हो जाने के बाद भी आदेश की अवहेलना की गई, और अवमानना मामले में संबंधित प्राधिकार संतोषजनक जवाब देने में विफल रहा।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि अब शिक्षक चुप बैठने वाले नहीं हैं। नियमावली 2020 के आलोक में हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए फिर से एमजेसी (अवमानना याचिका) दायर करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया गया। इस बार औरंगाबाद जिले के विशुद्ध नियोजित माध्यमिक शिक्षक ही याचिकाकर्ता बनेंगे।
डॉ. राकेश रंजन और याचिकाकर्ता सत्येंद्र नारायण सिंह ने बताया कि इस लड़ाई को मजबूती देने के लिए पटना उच्च न्यायालय के वरीय एवं प्रसिद्ध अधिवक्ता की सेवाएं ली जाएंगी। इसके लिए व्यापक कार्ययोजना और रणनीति तय करने हेतु 8 जनवरी 2026 को नियोजित माध्यमिक शिक्षकों की एक और महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।
बैठक में डॉ. राकेश रंजन, सत्येंद्र नारायण सिंह, डॉ. राम किशोर, अमरजीत कुमार, मनोज कुमार, उदय कुमार, विनय कुमार सिंह, अमित कुमार सिंह, कमलेश कौशल, अमलेश कुमार, केश रंजन कुमार और निरंजय कुमार सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे।
           अब सवाल सीधा है:
क्या सरकार और जिला परिषद हाईकोर्ट के आदेशों को गंभीरता से लेंगी, या नियोजित शिक्षकों को न्याय के लिए फिर कोर्ट की चौखट पर ही भटकना पड़ेगा?